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Rajasthan High court Hindi Dicatations // राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय की परीक्षा में की तैयारी हेतु हिंद डिक्‍टेशन

Hindi steno Dictaton ebook - Pulkit Education Academy

सभी स्‍टेनोग्राफी के विद्याार्थियों के लिए इस पुल्कित एज्‍युकेशन ऐकेडमकी की वेबसाईट पर डिक्‍टेशन उपलब्‍ध कराई जा रही है, विद्यार्थियों को प्रतिदिन नई-नई अलग अलग स्‍पीड में डिक्‍टेशन उपलब्‍ध करवाई जाऐंगी, स्‍टेनोग्राफी के विद्यार्थियों के लिए यह वेबसाईट बहुत ही उपयोगी रहेगी।

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प्रकरण मजिस्टेªट के न्यायालय द्वारा विचारणीय है उक्त समस्त कारणों तथा बरामदगी की मात्रा को दृष्टिगत रखते हुए -//- यह न्यायालय अभियुक्त को जमानत का लाभ प्रदान करना न्यायोचित समझता है अतः अभियुक्त का जमानत आवेदन स्वीकार -//- किया जाकर आदेश दिया जाता है कि यदि अभियुक्त न्यायालय में अपनी नियमित उपस्थिति बाबत 10000/- अक्षरे दस -//- हजार रूपये का निजि मुचलका व इसी राशि का एक प्रतिभू इस न्यायालय को सन्तुष्टिप्रद प्रस्तुत कर तस्दिक -//- 1 करवा देवे तो अभियुक्त को जमानत पर रिहा कर दिया जावे अन्यथा अभिरक्षा में रखा जावे आदेशानुसार जमानत -//- मुचलके प्रस्तुत हुए जो बाद जांच तस्दिक किये गए अभियुक्त को जमानत पर रिहा किया गया अभियुक्त की -//- रिहाई बाबत् तहरीर जारी हो अभियुक्त के जमानत मुचलके शामिल रिमाण्ड़ आवेदन रहे केस डायरी लौटाई गई परिवादी -//- मय अधिवक्ता उपस्थित अभियुक्त अनुपस्थित जिसकी हाजरी माफी का प्रार्थना पत्र जरिए अधिवक्ता पेश किया जो आज के -//- 2 लिए स्वीकार किया गया परिवादी की ओर से जरिए अधिवक्ता प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अन्तर्गत दिनांकित 02.06.2023 धारा 143ए -//- एनआई एक्ट पर बहस सुनी गई। पत्रावली का अवलोकन किया विद्वान अधिवक्ता परिवादी ने प्रार्थना पत्र में अंकित -//- तथ्यों को दोहराते हुए तर्क दिया है कि धारा 143ए परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत परिवादी को अंतरिम -//- राशि के तौर पर 20 प्रतिशत चैक राशि का भुगतान दिलवाए जाने का प्रावधान है, जिसे अन्तरिम राशि -//- 3 के तौर पर परिवादी प्राप्त करने का अधिकारी है यदि प्रार्थी परिवादी को अंतरिम राशि का भुगतान अभियुक्त -//- से नहीं दिलाया जाता है तो प्रार्थी परिवादी के साथ अन्याय होगा जिसकी क्षतिपूर्ति भविष्य में किया जाना -//- कतई संभव नहीं है अतः 20 प्रतिशत राशि अंतरिम राशि के रूप में दिलाई जावे उक्त प्रार्थना पत्र -//- का जवाब पेश कर अभियुक्त अधिवक्ता ने जवाब में वर्णित तथ्यों की पुनरावृत्ति करते हुए कथन किया कि -//- 4 प्रार्थना पत्र मात्र अभियुक्त को हैरान व परेशान करने के लिए पेश किया गया है अतः प्रार्थना पत्र -//- खारिज किया जावे प्रार्थना पत्र पर बहस सुनी गई पत्रावली का अवलोकन किया गया पत्रावली का अवलोकन किए -//- जाने से प्रस्तुत प्रकरण में परिवादी ने अभियुक्त के विरुद्ध धारा 138 एन.आई.एक्ट का परिवाद न्यायालय में दिनांक -//- 27.02.2019 को पेश किया गया है जिस पर न्यायालय द्वारा दिनांक 01.03.2019 को प्रसंज्ञान लिया गया जाकर दिनांक -//- 5 06.04.2023 को आरोप सारांश सुनाया जा चुका है प्रकरण वर्तमान में साक्ष्य परिवादी के स्तर पर नियत है -//- इस स्तर पर यह प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है अतः प्रार्थना अस्वीकार कर -//- खारिज किया जाता है परिवादी के अधिवक्ता उपस्थित अभियुक्त अनुपस्थित जिसकी ओर से उसके अधिवक्ता ने हाजरी माफी -//- का प्रार्थना पत्र पेश किया जो आज के लिए स्वीकार किया गया इस आदेश द्वारा अभियुक्त की ओर -//- 6 से उसके अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र दिनांकित 09.01.2024 बाबत धारा 91 सीआरपीसी बाबत् दस्तावेज परिवादी से तलब -//- करवाये जाने का निस्तारण किया जा रहा है बहस सुनी गई पत्रावली का अवलोकन किया गया दौराने बहस -//- अभियुक्त अधिवक्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों को दोहराते हुए कथन किया कि परिवादी ने जिरह -//- के दौरान यह स्वीकार किया है कि मेरे पास नमन ऐंटरप्राईजेज फर्म संचालन संबंधित कागजात उपलब्ध हैं उक्त -//- 7 कागजात मेरे घर पर हैं उक्त दस्तावेजात परिवादी के पावर आॅफ पजेशन में हैं जो तलब किया जावे -//- उक्त प्रार्थना पत्र का विरोध कर लिखित जवाब पेश नहीं कर परिवादी अधिवक्ता ने मौखिक कथन किया है -//- कि प्रकरण में मात्र विलंब कारित करने के उद्देश्य से यह प्रार्थना पत्र पेश किया गया है अतः -//- प्रार्थना पत्र खारिज किया जावे"

वहां मुल्जिम की कथित लापरवाही एवं उपेक्षा के कारण कारित उपहति व मृत्यु के लिए उसकी दोषसिद्धी संवहनीय -//- नहीं है अतः माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी परोक्ष रूप से यही मत प्रतिपादित किया गया है कि -//- जहां अभियुक्त का वक्त दुर्घटना बतौर चालक होना ही स्थापित नहीं है वहां उसकी लापरवाही एवं उपेक्षा के -//- कारण कारित क्षति व मृत्यु के लिए उसकी दोषसिद्धी नहीं की जा सकती मुल्जिम के विरुद्ध अन्य कोई -//- 1 प्रकरण लंबित नहीं है प्रकरण जिरह परिवादी के स्तर पर नियत है अतः प्रार्थना पत्र खारिज किया जावे -//- सुना गया पत्रावली का अवलोकन किया गया प्रस्तुत प्रकरण परिवादी द्वारा एनआई एक्ट की धारा 138 में परिवाद -//- न्यायालय में दिनांक 09.08.2019 को पेश किया गया है जो कि वर्तमान में जिरह परिवादी के स्तर पर -//- नियत है प्रकरण आयकर अधिनियम से संबंधित नहीं होकर एनआईएक्ट से संबंधित है परिवादी के पास उक्त चैक -//- 2 की राशि कहां से आई यह साक्ष्य का विषय है जो कि प्रकरण के निस्तारण के समय देखा -//- जाना है परिवादी अधिवक्ता ने अपनी बहस में भी कथन किया है कि मुल्जिम के विरुद्ध अन्य कोई -//- प्रकरण लंबित नहीं है ऐसा प्रतीत होता है कि अभियुक्त द्वारा प्रकरण में अनावश्यक विलंब कारित करने के -//- आशय से यह प्रार्थना पत्र पेश किया गया है अतः प्रार्थना पत्र अस्वीकार कर खारिज किया जाता है -//- 3 संक्षेप में प्रकरण के तथ्य इस प्रकार है कि परिवादीया ने उपस्थित पुलिस थाना होकर एक लिखित रिपोर्ट -//- इस आशय की पेश की कि दिनांक 22.01.2013 को समय शाम के करीब 7 से 8 बजे वह -//- अपने परिवार के साथ जयपुर में शादी में चली गई थी उसके बाद वह उक्त दिनांक को ही -//- रात के करीब 10 बजे उसके पास पड़ोसियों का फोन आया कि आपके घर में चोरी हो गई -//- 4 है करीब 11 बजे मैं अपने उक्त प्लाॅट पर आई और देखा कि कमरे का ताला खुला हुआ -//- था अंदर जाकर देखा तो एक चांदी और सोने की अंगूठी चांदी की बिछुड़ी एक सोने की चेन -//- 16 हजार रुपए नकद जो कि कमरे में रखे एक सूटकेस में रखे थे जो गायब मिले कोई -//- अज्ञात चोर दिनांक 22.01.2013 को शाम के करीब 7 से 8 बजे के बीच चुराकर ले गया था -//- 5 अभियोजन अधिकारी उपस्थित अभियुक्त के अधिवक्ता ने दिनांक 31.05.2022 को जमानत आवेदन पत्र न्यायालय में पेश किया जिस -//- पर केस डायरी तलब की गई दौराने बहस अधिवक्ता अभियुक्त ने जमानत प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों को -//- दोहराते हुए कथन किया कि प्रार्थी अभियुक्त को इस प्रकरण में झंूठा फसाया गया है प्रार्थी बिल्कुल निर्दोष -//- है उसने कोई अपराध कारित नही किया है प्रार्थी माननीय न्यायालय के आदेशानुसार जमानत मुचलके पेश करने का -//- 6 तैयार है उक्त आधारों पर जमानत पर रिहा करने का निवेदन किया। विद्वान अभियोजन अधिकारी ने उक्त तर्कों -//- का विरोध किया व जमानत आवेदन खारिज करने का निवेदन किया सुना गया केस ड़ायरी व संबधित विधि -//- का ध्यानपूर्वक अध्ययन व अवलोकन किया गया केस ड़ायरी के अवलोकन से अभियुक्त को दिनांक 27.05.2022 को बिना -//- अनुज्ञा के अपने कब्जे में कुल 28 पव्वे घूमर सादा देशी शराब 50 यूपी बरामद किये गये जिनको -//- 7 रखने उक्त मात्रा अनुज्ञप्त मात्रा से अधिक होने के अपराध के लिए दिनांक 30.05.2022 को गिरफ्तार किया है -//- हालांकि अभियुक्त के विरुद्ध 3 अन्य प्रकरण इसी प्रकृति के विचाराधीन हैं किन्तु अभियुक्ता महिला है तथा दिनांक -//- 30.05.2022 से अभियुक्त न्यायिक अभिरक्षा में है अभियुक्ता अधिवक्ता ने अभियुक्त के टीबी होने के चिकित्सकीय दस्तावेजात न्यायालय -//- में पेश किये हैं"

अभियोजन पक्ष की ओर से अभियुक्त के विरुद्ध आरोपित अपराध को साबित करने के लिये मौखिक साक्ष्य में //- गवाह पीडब्ल्यू 1 लगायत 6 को परीक्षित कराया गया दस्तावेजी साक्ष्य में प्रदर्श पी 1 लगायत 8 को //- प्रदर्शित कराया गया जिरह के दौरान प्रदर्श डी 1 लगायत 3 को प्रदर्शित कराया गया शेष गवाहान को //- बार बार तलब किये जाने के पश्चात् भी गवाहान के न्यायालय में उपस्थित नहीं आने पर साक्ष्य अभियोजन //- 1 बंद की गई धारा 313 दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के तहत अभियुक्त के बयान मुल्जिम लेखबद्ध किये गए //- अभियुक्त अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत गवाहों की साक्ष्य से इंकार कर साक्ष्य प्रतिरक्षा पेश नहीं करना //- जाहिर किया बहस अंतिम सुनी गई विद्वान अभियोजन अधिकारी ने पत्रावली पर आई मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्य के //- आधार पर अभियुक्त के विरुद्ध आरोपित अपराध धारा 279 304ए भारतीय दण्ड संहिता संदेह से परे प्रमाणित होने //- 2 का कथन करते हुए अभियुक्त को आरोपित अपराध के लिये दोषसिद्ध किया जाकर विधिनुसार दण्ड से दण्डित किये //- जाने का निवेदन किया विद्वान अधिवक्ता अभियुक्त ने उक्त तर्कों का विरोध कर कथन किया कि अभियोजन पक्ष //- के किसी भी गवाह ने अभियोजन कहानी की ताईद नहीं की है अभियुक्त को झूंठा फंसाया गया है //- प्रकरण में महत्वपूर्ण गवाहान परीक्षित नहीं हुए हैं परीक्षित गवाहान ने अभियुक्त की घटना के समय मौके पर //- 3 उपस्थित होने की स्पष्ट साक्ष्य नहीं दी है एवं विरोधाभासी कथन किये हैं उक्त समस्त आधारों पर अभियुक्त //- को दोषमुक्त करने का निवेदन किया उभय पक्षों के तर्कों पर मनन किया सुसंगत अभिलेख व संबंधित विधि //- का ध्यानपूर्वक अध्ययन व अवलोकन किया गया न्यायालय के निर्णय किये जाने योग्य विचारणीय बिंदु निम्न हैं क्या //- आरोपित अभियुक्त ने दिनांक 01.03.2014 को किसी समय मोटरसाइकिल पर सवार होकर तेजगति व लापरवाही से चलाकर लक्ष्मीनारायण //- 4 के टक्कर मारकर उसके मानव जीवन को संकटापित किया जिससे उसकी मृत्यु कारित हुई यदि हां तो अभियुक्त //- को किस दण्ड से दण्डित किया जाए प्रस्तुत प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से अभियुक्त के विरूद्व //- आरोपित अपराध को साबित करने के लिए मौखिक साक्ष्य में गवाह पीडब्ल्यू 1 सांवरमल ने अपने बयान में //- कथन किया कि दिनांक 01.03.2014 को दिन में उसके चाचा लक्ष्मीनारायण पवन रवाना हुए रामपुरा पहुंचे जीप से //- 5 उतरे और रोड़ के साईड में फुटपाथ पर खड़े बातचीत कर रहे थे मोटरसाइकिल का चालक उसे तेजगति //- व लापरवाही से चलाकर लाया और उसके चाचा के टक्कर मार दी। जिससे लक्ष्मीनारायण जी रोड़ पर गिर //- गए। पल्सर मोटरसाइकिल का चालक व जो उसके पीछे बैठा था यह तीनों ही घायल हो गए 108 //- एंबुलेंस आई और अस्पताल में भर्ती कराया। घटना का समय पांच बजे का था। बराला से एसएमएस रेफर //- 6 कर दिया वहां लक्ष्मीनारायण जी की रात को नो बजे मृत्यु हो गयी। यह दुर्घटना मोटरसाइकिल चालक की //- गलती से हुई थी। घटना की रिपोर्ट प्रदर्श पी 1 है जिरह में गवाह ने कथन किया कि //- वे लोग एक ही जगह खड़े थे इस प्रकार अभियुक्त ने दिनांक 01.03.2014 को किसी समय रामपुरा पर //- मोटरसाइकिल पर सवार होकर तेजगति व लापरवाही से चलाकर टक्कर मारे जाना अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर पाया //- 7 है इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित न्यायिक दृष्टांत 1990 आरएलडब्ल्यू राजस्थान पेज 97 संग्राम सिंह //- बनाम स्टेट आॅफ राजस्थान का उल्लेख करना उचित समझता हूं जिसमें माननीय उच्च न्यायालय ने यह मत प्रतिपादित //- किया कि जहां यह दर्शित करने बाबत् पर्याप्त तथ्य नहीं हैं कि मुल्जिम दुर्घटना के समय वाहन चला //- रहा था तथा मुल्जिम को घटना से जोड़ने बाबत साक्ष्य नहीं हैं"

परिवादी के अधिवक्ता उपस्थित अभियुक्त अनुपस्थित जिसकी ओर से उसके अधिवक्ता ने हाजरी माफी का प्रार्थना पत्र पेश //- किया जो आज के लिए स्वीकार किया गया इस आदेश द्वारा अभियुक्त की ओर से उसके अधिवक्ता द्वारा //- प्रस्तुत प्रार्थना पत्र दिनांकित 22.11.2023 बाबत् धारा 91 सीआरपीसी बाबत् दस्तावेज परिवादी से तलब करवाये जाने का निस्तारण //- किया जा रहा है बहस सुनी गई पत्रावली का अवलोकन किया गया दौराने बहस अभियुक्त अधिवक्ता ने अपने //- 1 प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों को दोहराते हुए कथन किया कि परिवादी व उसकी पत्नी के आधिपत्य का //- एक भूखण्ड क्रय किया गया जिस विक्रित भूखण्ड की प्रतिफल राशि पेटे अभियुक्त द्वारा विवादित चैक जारी किया //- गया था लेकिन परिवादी द्वारा अपने परिवाद के समर्थन में ऐसा कोई विक्रय पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत //- नहीं किया है। अतः परिवादी से उक्त विक्रय पत्र तलब किया जावे उक्त प्रार्थना पत्र का विरोध कर //- 2 लिखित जवाब पेश नहीं कर परिवादी अधिवक्ता ने मौखिक कथन किया है कि विवादित भूखण्ड के विक्रय का //- विक्रय पत्र निष्पादित नहीं किया गया है प्रकरण में मात्र विलंब कारित करने के उद्देश्य से यह प्रार्थना //- पत्र पेश किया गया है अतः प्रार्थना पत्र खारिज किया जावे पत्रावली का अवलोकन किये जाने से अधिवक्ता //- अभियुक्त द्वारा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर कथन किया गया है कि परिवादी व उसकी पत्नी के आधिपत्य का //- 3 एक भूखण्ड क्रय किया गया जिस विक्रित भूखण्ड की प्रतिफल राशि पेटे अभियुक्त द्वारा विवादित चैक जारी किया //- गया था लेकिन परिवादी द्वारा अपने परिवाद के समर्थन में ऐसा कोई विक्रय पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत //- नहीं किया है अतः परिवादी से उक्त विक्रय पत्र तलब किया जावे इसके विरोध में परिवादी अधिवक्ता ने //- दौराने बहस कथन किया कि भूखण्ड के पेटे किसी प्रकार का विक्रय पत्र निष्पादित नहीं किया गया है //- 4 प्रार्थना पत्र मात्र विलंब कारित करने के आशय से पेश किया गया है। इस संबंध में पत्रावली का //- अवलोकन किये जाने से किसी भी प्रकार का विक्रय पत्र निष्पादित किया जाना प्रकट नहीं होता है। इस //- संबंध में परिवादी अधिवक्ता ने भी विक्रय पत्र निष्पादित किये जाने से इंकार किया है। केवल मात्र प्रकरण //- में विलंब कारित किये जाने के आशय से यह प्रार्थना पत्र पेश किया जाना प्रतीत होता है। अतः //- 5 अधिवक्ता अभियुक्त की ओर प्रस्तुत प्रार्थना पत्र दिनांकित 22.11.2023 अस्वीकार कर खारिज किया जाता है। संक्षेप में प्रकरण //- के तथ्य इस प्रकार है कि परिवादी सांवरमल ने उपस्थित पुलिस थाना होकर एक लिखित रिपोर्ट इस आशय //- की पेश की कि दिनांक 01.03.2014 को उसकी मासी के बेटे की शादी की मेल में वह उसका //- चाचा तथा उनका बेटा घर से रवाना होकर रामपुरा पहुंचे जीप से उतरकर सड़क पार करने के लिए //- 6 फुटपाथ पर खड़े थे कि एक प्लसर मोटरसाइकिल का चालक तेजगति व लापरवाही से चलाकर लाया व उसके //- चाचा के जोर से टक्कर मारी वो फुटपाथ पर गिर गए तथा मोटरसाइकिल सवार दो लड़के भी वहीं //- पर गिर गए तीनों को अस्पताल लेकर आए चाचा की हालत ज्यादा खराब होने से एसएमएस रैफर कर //- दिया जहां उनकी मृत्यु हो गई जिस पर एफआईआर अपराध अंतर्गत धारा 279 337 304ए भारतीय दण्ड संहिता //- 7 में दर्ज की जाकर बाद आवश्यक अनुसंधान आरोप पत्र अभियुक्त के विरुद्ध अपराध अंतर्गत धारा 279, 304ए भारतीय //- दण्ड संहिता में पेश किया जिस पर अभियुक्त के विरूद्व उक्त अपराध के लिये प्रसंज्ञान लिया जाकर प्रकरण //- दर्ज रजिस्टर किया गया अभियुक्त के विरुद्ध अपराध अंतर्गत धारा 279 304ए भारतीय दण्ड संहिता में आरोप प्रथम //- दृष्ट्या अपराध बनना पाये जाने पर उक्त अपराध में अभियुक्त को आरोप सारांश मौखिक रूप से सुनाया व //- 8 समझाया गया तो अभियुक्त ने आरोप को अस्वीकार कर अन्वीक्षा चाही"

अभियोजन अधिकारी के निवेदन पर गवाह को पक्षद्रोही घोषित किया गया अभियोजन अधिकारी द्वारा की गई जिरह में //- गवाह ने कथन किया कि पुलिस में उसके बयान हुए हों तो उसे ध्यान नहीं है नक्शा मौका //- प्रदर्श पी 4 पर उसके हस्ताक्षर हैं उसकी चोटों का मेडिकल हुआ था जो प्रदर्श पी 5 है //- यह कहना गलत है कि मुल्जिमान ने एक राय होकर उसके साथ मारपीट की हो यह गवाह पक्षद्रोही //- 1 घोषित हुआ है गवाह पीडब्ल्यू 2 जो कि प्रकरण में मजरूब एवं परिवादी है ने अपने बयान में //- कथन किया कि अभियुक्तगण उसके परिवार के ही सदस्य हैं जिनके साथ मामूली कहासुनी हो गई थी रिपोर्ट //- प्रदर्श पी 2 दर्ज कराई थी नक्शा मौका प्रदर्श पी 4 है अभियोजन अधिकारी के निवेदन पर गवाह //- को पक्षद्रोही घोषित किया गया अभियोजन अधिकारी द्वारा की गई जिरह में गवाह ने कथन किया कि प्रदर्श //- 2 पी-6 पुलिस बयान का ए से बी भाग उसने पुलिस को नहीं दिया जिरह में गवाह ने कथन //- किया कि हमारा आपस में राजीनामा हो गया है इसिलए आगे कोई कार्यवाही नहीं चाहता हूं उक्त दोनों //- ही गवाह प्रस्तुत प्रकरण में मुख्य व महत्वपूर्ण गवाह होकर पक्षद्रोही रहे हैं इन दोनों ही गवाहों ने //- ऐसा कोई कथन नहीं किया जिससे अभियोजन कहानी की ताईद होती हो उक्त दोनों ही गवाहान प्रकरण में //- 3 महत्वपूर्ण गवाह हैं जो कि परिवादी व मजरूब हैं जिनके पक्षद्रोही होने से शेष गवाहान की साक्ष्य बंद //- की गई पक्षकारान के मध्य आपस में राजीनामा होने से अभियुक्तगण को धारा 149 भारतीय दंड संहिता में //- जरिये राजीनामा दोषमुक्त घोषित किया जा चुका है। अभियोजन पक्ष यह तथ्य युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने //- में असफल रहा है कि अभियुक्तगण द्वारा दिनांक 09.08.2022 को समय करीब 4 पीएम के लगभग जोगियो के //- 4 मोहल्ले में परिवादी के साथ एक राय होकर बल या हिंसा का प्रयोग कर उनके साथ बलवा कारित //- किया हो अतः प्रकरण के तथ्यों व परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्तगण को आरोपित अपराध अंतर्गत धारा //- 147 भारतीय दण्ड संहिता में संदेह का लाभ दिया जाकर दोषमुक्त घोषित किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है //- परिवादी के अधिवक्ता उपस्थित अभियुक्त अनुपस्थित जिसकी ओर से हाजरी माफी का प्रार्थना पत्र पेश हुआ जो आज //- 5 के लिए स्वीकार किया गया इस आदेश द्वारा अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र दिनांकित 05.03.2022 बाबत् //- अंतर्गत धारा 269 एसएस आयकर अधिनियम का निस्तारण किया जा रहा है बहस प्रार्थना पत्र सुनी गई पत्रावली //- का अवलोकन किया गया दौराने बहस अधिवक्ता अभियुक्त ने प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों को दोहराते हुए कथन //- किया कि परिवादी ने प्रार्थी अभियुक्त को चैक दिनांकित 25.06.2019 तादादी 50 हजार रुपये का अभियोजन प्रार्थी अभियुक्त //- 6 के विरुद्ध किया है और जरिए चैक व नकद रूप से देना अभिकथित किया है माननीय उच्चतम न्यायालय //- ने न्यायिक दृष्टांत कृष्ण जनार्दन भट्ट बनाम दत्तात्रेय जी हैगडे के न्यायिक विनिश्चय में यह सिद्धांत प्रतिपादित किया //- है कि आयकर अधिनियम की धारा 269 एसएस की पालना किया जाना अतिआवश्यक है और इसकी अनुपस्थिति में //- यह उपधारणा की जावेगी कि ऐसा कोई ट्रांजेक्शन हुआ ही नहीं है परन्तु ऐसा कोई तथ्य परिवाद प्रथम //- 7 दृष्ट्या साबित नहीं कर पाया है ऐसी स्थिति में परिवाद पत्र इस स्तर पर निरस्त किया जावे उक्त //- तर्कों का विरोध कर जवाब पेश नहीं कर मौखिक बहस में तर्क परिवादी अधिवक्ता द्वारा इस आशय के //- पेश किए गए कि अभियुक्त द्वारा यह प्रार्थना पत्र मात्र प्रकरण में विलम्ब कारित करने के आशय से //- पेश किया गया है"

संक्षेप में प्रकरण के तथ्य इस प्रकार है कि परिवादी ने उपस्थित पुलिस थाना होकर एक लिखित रिपोर्ट //- इस आशय की पेश की कि वह कल शाम 4 बजे अपने घर से मुहर्रम के लिए आ //- रहा था तो जोगियों के मोहल्ले में सागर होटल के पीछे ये लोग पहले से घात लगाकर बैठे //- थे तथा इनके हाथों में डण्डे थे इन लोगों ने एक राय होकर अचानक उसके ऊपर हमला कर //- 1 दिया उसको डंडों से मारा और डंडे की चोट के कारण उसका एक दांत भी झड़ गया उस //- समय उसका चाचा भी झगड़ा होते देख रहा था बीच बचाव करवाने लगा तो उसके चाचा अनवर के //- साथ भी मारपीट की मारपीट के समय उसके गले की सोने की चेन तोड़ ली जिस पर पुलिस //- थाना द्वारा एफआईआर संख्या 553/2022 अपराध अंतर्गत धारा 147 भारतीय दंड संहिता में दर्ज की जाकर बाद आवश्यक //- 2 अनुसंधान आरोप पत्र अपराध अंतर्गत धारा 147 भारतीय दंड संहिता में अभियुक्तगण के विरुद्ध पेश किया न्यायालय द्वारा //- उक्त अपराध में उक्त अभियुक्तगण के विरुद्ध प्रसंज्ञान लिया जाकर प्रकरण दर्ज रजिस्टर किया गया न्यायालय द्वारा अपराध //- अंतर्गत धारा 147 भारतीय दंड संहिता में बहस चार्ज सुनी जाकर अभियुक्तगण को अपराध अंतर्गत धारा 147 भारतीय //- दंड संहिता में आरोप सारांश मौखिक रूप से सुनाया व समझाया गया जिसे सुन समझकर अभियुक्तगण ने आरोप //- 3 अस्वीकार किया व अन्वीक्षा चाही उभय पक्षकारान के द्वारा राजीनामा पेश किए जाने बाद जांच राजीनामा तस्दीक किए //- जाने पर अभियुक्तगण को अपराध अंतर्गत धारा 149 भारतीय दंड संहिता में जरिये राजीनामा दोषमुक्त घोषित किया गया //- अब केवल मात्र धारा 147 भारतीय दंड संहिता में विचारण शेष है अभियोजन पक्ष की ओर से अभियुक्तगण //- के विरूद्व आरोपित अपराध को साबित करने के लिए मौखिक साक्ष्य में गवाह पीडब्ल्यू 1 लगायत 7 को //- 4 प्रदर्शित कराया गया प्रकरण में पीड़ित व परिवादी द्वारा पक्षद्रोही घोषित होने पर शेष गवाहान की तलबी बंद //- कर दी गई धारा 313 दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के तहत अभियुक्तगण के बयान मुलजिम लेखबद्ध किये गए //- अभियुक्तगण अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत गवाहों की साक्ष्य से इंकार कर स्वयं को निर्दोष होने का //- कथन करते हुये साक्ष्य प्रतिरक्षा पेश करने से इंकार किया बहस अंतिम सुनी गई पत्रावली का अवलोकन किया //- 5 गया विद्वान अभियोजन अधिकारी ने पत्रावली पर आई मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर अभियुक्तगण के विरुद्ध //- आरोपित अपराध धारा 147 भारतीय दण्ड संहिता 1860 संदेह से परे प्रमाणित होने का कथन करते हुए अभियुक्तगण //- को आरोपित अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाकर विधिनुसार दण्ड से दण्डित किये जाने का निवेदन किया विद्वान //- अधिवक्ता अभियुक्तगण ने उक्त तर्कों का विरोध कर कथन किया कि अभियोजन पक्ष के किसी भी गवाह ने //- 6 अभियोजन कहानी की ताईद नहीं की है अभियुक्तगण को झूंठा फंसाया गया है मुख्य गवाह पक्षद्रोही घोषित हुए //- हैं उक्त समस्त आधारों पर अभियुक्तगण को दोषमुक्त करने का निवेदन किया उभय पक्षों के तर्कों पर मनन //- किया सुसंगत अभिलेख व संबंधित विधि का ध्यानपूर्वक अध्ययन व अवलोकन किया गया न्यायालय के समक्ष निर्णय किये //- जाने योग्य विचारणीय बिन्दु निम्न हैं क्या आरोपित अभियुक्तगण ने समय करीब 4 पीएम के लगभग जोगियो के //- 7 मोहल्ले में सागर होटल के पीछे परिवादी सोहिल व अनवर के साथ एक राय होकर बल या हिंसा //- का प्रयोग कर उनके साथ बलवा कारित किया यदि हां तो अभियुक्त को किस दण्ड से दण्डित किया //- जाए प्रस्तुत प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह पीडब्ल्यू 1 अनवर जो कि प्रकरण में मजरूब //- है ने अपने बयान में कथन किया कि उसे घटना की जानकारी नहीं है ना ही उसके सामने //- 8 नक्शा मौका बना था"

पर्यावरण हमारी पृथ्वी पर जीवन का आधार है। मानव सभ्यता के विकास में पर्यावरण की महती भूमिका रही -//- है। पर्यावरण का आशय ऐसे वातावरण से है जिससे संपूर्ण ब्रह्माण्ड व जीव जगत घिरा हुआ है। हमारे -//- चारों ओर के भौतिक, अभौतिक, जैविक, रासायनिक तथा प्राकृतिक परिवेश को पर्यावरण के नाम से जाना जाता है। -//- जैविक, अजैविक, रासायनिक तत्वों का अस्तित्व नैसर्गिक रूप से संतुलित अवस्था में रहता है। इस प्राकृतिक संतुलन में -//- 1 अवांछित असंतुलन की स्थिति पर्यावरण प्रदूषण को अभिव्यक्त करती है। आज औद्योगिकीकरण, स्वचालितीकरण, नगरीयकरण एवं मशीनीकरण के परिणामस्वरूप -//- पर्यावरण प्रदूषण अपने चरम पर है। फलस्वरूप पारिस्थितिकीय असंतुलन भी निरंतर बढ़ रहा है। जल, वायु, ध्वनि, मृदा -//- प्रदूषण, समुद्री प्रदूषण, रेडियाधर्मी प्रदूषण, कीटनाशक प्रदूषण, विद्युत चुम्बकीय विकिरण प्रदूषण के अतिरिक्त नाभिकीय प्रदूषण तथा ई वेस्ट -//- आधुनिक युग में सर्वाधिक खतरनाक हैं। वायु प्रदूषण के परिणामस्वरूप ग्लोबल वार्मिंग, ग्रीन हाउस प्रभाव तथा ओजोन परत -//- 2 का क्षय हो रहा है, जिससे संपूर्ण मानव जाति खतरे के कगार पर बैठी है। आजकल साइबर युग -//- में विज्ञान वरदान के साथ अभिशाप भी बनता जा रहा इलेक्ट्राॅनिक कूड़ा कबाड़, कम्प्यूटर मोबाइल का कबाड़ विकासशील -//- देशों विशेषकर भारत में बड़ी मुसिबत बनता जा रहा है। भारत एक विकासशील देश है और जलवायु परिवर्तन -//- के दुष्प्रभावों के प्रति न सिर्फ सचेत है, बल्कि सक्रिय भी है। भारत द्वारा इस दिशा में ठोस -//- 3 कदम उठाने की शुरुआत 2008 में तब की गई जब प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना की -//- घोषणा की। जैव विविधता वास्तव में जैव संपदा को अभिव्यक्त करने वाली अवधाराणा है। इसका आशय जीवों की -//- उस विविधता और संख्या से है, जिसमें पौधे और पशु पक्षी दोनों शामिल हैं। जीव जन्तुओं और वनस्पतियों -//- की संख्या जितनी अधिक होती है, जैव विविधता को उतना ही अधिक संपन्न माना जाता है। भारत जैव -//- 4 संपदा की दृष्टि से संपन्न देश माना जाता है। यहां प्राणियों की करीब 81 हजार प्रजातियां पाई जाती -//- हैं। वन संपदा की दृष्टि से भारत का विश्व में दसवां और एशिया में चैथा स्थान है। जैव -//- विविधता की रक्षा में वनों का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। अंधाधुंध कटाई, वनों को नष्ट कर मानव बस्तियों -//- का निर्माण, अनियोजित खनन, सड़क निर्माण, अतार्किक दोहन एवं वृक्षारोपण की कमी ने वनों के उजड़ने में अहम -//- 5 भूमिका निभाई है। पृथ्वी के औसत तापक्रम में प्रदूषण के कारण निरंतर वृद्धि वैश्विक ताप या वृद्धि या -//- भूमंडलीय तापन या ग्लोबल वार्मिंग कहलाती है। वायु प्रदूषण के कारण कार्बन डाईआॅक्साइड, सल्फर डाईआॅक्साइड, कार्बन तथा अन्य -//- प्रदूषण वाली गैसें वायुमंडल में अपनी मात्रा बढ़ा लेती है। फलस्वरूप सूर्य से आने वाली ऊष्मा वापस लौटकर -//- नहीं जा पाती। यही कारण है कि निरंतर पृथ्वी का तापक्रम बढ़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग से मौसम -//- 6 के चक्र में भी परिवर्तन आए हैं।"

अभियोजन अधिकारी के निवेदन पर गवाह को पक्षद्रोही घोषित किया गया अभियोजन अधिकारी द्वारा की गई जिरह में //- गवाह ने कथन किया कि पुलिस में उसके बयान हुए हों तो उसे ध्यान नहीं है नक्शा मौका //- प्रदर्श पी 4 पर उसके हस्ताक्षर हैं उसकी चोटों का मेडिकल हुआ था जो प्रदर्श पी 5 है //- यह कहना गलत है कि मुल्जिमान ने एक राय होकर उसके साथ मारपीट की हो यह गवाह पक्षद्रोही //- 1 घोषित हुआ है गवाह पीडब्ल्यू 2 जो कि प्रकरण में मजरूब एवं परिवादी है ने अपने बयान में //- कथन किया कि अभियुक्तगण उसके परिवार के ही सदस्य हैं जिनके साथ मामूली कहासुनी हो गई थी रिपोर्ट //- प्रदर्श पी 2 दर्ज कराई थी नक्शा मौका प्रदर्श पी 4 है अभियोजन अधिकारी के निवेदन पर गवाह //- को पक्षद्रोही घोषित किया गया अभियोजन अधिकारी द्वारा की गई जिरह में गवाह ने कथन किया कि प्रदर्श //- 2 पी-6 पुलिस बयान का ए से बी भाग उसने पुलिस को नहीं दिया जिरह में गवाह ने कथन //- किया कि हमारा आपस में राजीनामा हो गया है इसिलए आगे कोई कार्यवाही नहीं चाहता हूं उक्त दोनों //- ही गवाह प्रस्तुत प्रकरण में मुख्य व महत्वपूर्ण गवाह होकर पक्षद्रोही रहे हैं इन दोनों ही गवाहों ने //- ऐसा कोई कथन नहीं किया जिससे अभियोजन कहानी की ताईद होती हो उक्त दोनों ही गवाहान प्रकरण में //- 3 महत्वपूर्ण गवाह हैं जो कि परिवादी व मजरूब हैं जिनके पक्षद्रोही होने से शेष गवाहान की साक्ष्य बंद //- की गई पक्षकारान के मध्य आपस में राजीनामा होने से अभियुक्तगण को धारा 149 भारतीय दंड संहिता में //- जरिये राजीनामा दोषमुक्त घोषित किया जा चुका है। अभियोजन पक्ष यह तथ्य युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने //- में असफल रहा है कि अभियुक्तगण द्वारा दिनांक 09.08.2022 को समय करीब 4 पीएम के लगभग जोगियो के //- 4 मोहल्ले में परिवादी के साथ एक राय होकर बल या हिंसा का प्रयोग कर उनके साथ बलवा कारित //- किया हो अतः प्रकरण के तथ्यों व परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्तगण को आरोपित अपराध अंतर्गत धारा //- 147 भारतीय दण्ड संहिता में संदेह का लाभ दिया जाकर दोषमुक्त घोषित किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है //- परिवादी के अधिवक्ता उपस्थित अभियुक्त अनुपस्थित जिसकी ओर से हाजरी माफी का प्रार्थना पत्र पेश हुआ जो आज //- 5 के लिए स्वीकार किया गया इस आदेश द्वारा अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र दिनांकित 05.03.2022 बाबत् //- अंतर्गत धारा 269 एसएस आयकर अधिनियम का निस्तारण किया जा रहा है बहस प्रार्थना पत्र सुनी गई पत्रावली //- का अवलोकन किया गया दौराने बहस अधिवक्ता अभियुक्त ने प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों को दोहराते हुए कथन //- किया कि परिवादी ने प्रार्थी अभियुक्त को चैक दिनांकित 25.06.2019 तादादी 50 हजार रुपये का अभियोजन प्रार्थी अभियुक्त //- 6 के विरुद्ध किया है और जरिए चैक व नकद रूप से देना अभिकथित किया है माननीय उच्चतम न्यायालय //- ने न्यायिक दृष्टांत कृष्ण जनार्दन भट्ट बनाम दत्तात्रेय जी हैगडे के न्यायिक विनिश्चय में यह सिद्धांत प्रतिपादित किया //- है कि आयकर अधिनियम की धारा 269 एसएस की पालना किया जाना अतिआवश्यक है और इसकी अनुपस्थिति में //- यह उपधारणा की जावेगी कि ऐसा कोई ट्रांजेक्शन हुआ ही नहीं है परन्तु ऐसा कोई तथ्य परिवाद प्रथम //- 7 दृष्ट्या साबित नहीं कर पाया है ऐसी स्थिति में परिवाद पत्र इस स्तर पर निरस्त किया जावे उक्त //- तर्कों का विरोध कर जवाब पेश नहीं कर मौखिक बहस में तर्क परिवादी अधिवक्ता द्वारा इस आशय के //- पेश किए गए कि अभियुक्त द्वारा यह प्रार्थना पत्र मात्र प्रकरण में विलम्ब कारित करने के आशय से //- पेश किया गया है"

लेकिन वे कुत्ते कूड़ा बीनने वाले बच्चों पर ही क्यों अपनी धौंस दिखाते हैं थोड़ा आगे एक दूसरी सोसाइटी //- के बाहर बहुत सी गाड़ियां खड़ी रहती हैं। उस दिन भी थीं। मैं लाइन से लगी गाड़ियों के बगल //- से गुजर रहा था। बस एक गाड़ी स्टार्ट थी लेकिन सीट पर कोई दिख नहीं रहा था। अगल बगल //- भी कोई व्यक्ति नहीं था। आसपास सिर्फ दूसरी गाड़ियां थीं जिन्हें देखकर बताया जा सकता है कि वे लंबे //- 1 समय से नहीं चली हैं। मैं आगे बढ़ गया। टहलने के दूसरे चक्कर में फिर वहीं पहुंचा। अभी भी //- गाड़ी स्टार्ट ही थी। मेरी नजर गाड़ी की पिछली सीट पर गई। शायद दो लोग थे। मैं टहलते हुए //- आगे बढ़ गया। सुबह के नौ बज चुके थे। चाय की दुकान जो सड़क पर थी वह पूर्णबंदी के //- चलते एक दीवार के पीछे चली गई है। चाय मिलती है वहां लेकिन अब सड़क से वह मेज स्टोव //- 2 दिखाई नहीं देता है। दो पुरुष सफाईकर्मी सड़क के कोने पर खड़े होकर चाय पी रहे थे। तीन महिला //- सफाईकर्मी उनके पास ही बैठी थीं। वे चाय नहीं पी रही थीं। चाय पीता हुआ एक आदमी कह रहा //- था कि वह इस साल अपने बेटे का रिश्ता करेगा। बस लड़की अच्छी चाहिए। मैं चलता जा रहा था। //- आगे कूड़ा उठाने वाली गाड़ी खड़ी थी। गाड़ी चलाने वाला अपनी सीट पर जमा हुआ था। इन दिनों इस //- 3 गाड़ी में स्वच्छता वाला गाना नहीं बज रहा है। कभी कभी किसी चीज की अनुपस्थिति आपको उसके होने से //- अधिक याद आती है। इस गाड़ी के साथ वाले आदमी ने कूड़े में से लिफाफा उठाया। लिफाफा बंद था //- और किसी कूरियर कंपनी का स्टीकर था उस पर। मैं दो कदम आगे बढ़ चुका था। हमारे पीछे जो //- भाई साहब टहलते हुए जा रहे थे उनसे वह लिफाफे का पता पढ़वाता है। सबको पता है कि आलस //- 4 एक बुरी आदत होती है लेकिन आलस करना सबको अच्छा लगता है। एक दोस्त की याद आ जाती है //- कि देर तक मास्क भी नहीं लगाना चाहिए। वैसे महामारी के बाद का एक रक्षा कवच भी है मेरे //- पास जिसमें दो तीन महीने तक कोई मेहनत वाले काम के लिए जोर नहीं देगा। जब सब काम आराम //- आराम से यानी धीरे धीरे करना है तो मुझे लगता है कि बस अब आज अधिक नहीं टहलना चाहिए। //- 5 मैं वापस लौटा। कार की सफाई करने वालों को अभी सोसाइटी यानी रिहाइशी इमारत के परिसर में जाने की //- इजाजत नहीं है। सुबह वे मुख्य दरवाजे के बाहर अपनी बाल्टी और कपड़ा लेकर बैठे थे। जिन लोगों ने //- अपनी गाड़ी बाहर लगा दी थी उन्हें वे साफ कर रहे थे। घरों में सहायिका का काम करने वाले //- किसी पुरुष या महिलाओं को भी भीतर जाने की इजाजत नहीं है। डर कितने लोगों को किससे कितना दूर //- 6 कर देता है।

आवश्यकता अनुरूप बदलो, आगे बढ़ो, फिर अपनी शर्तों पर चलो। यह चीनी मानस बन गया। ब्रिटेन अमेरिका को दुनिया की //- आर्थिक ताकत बनने में जो समय लगा, उससे कम समय में चीन उन्हें चुनौती देने लगा। ली ने चीनी मानस //- पर टिप्पणी की है। चीनी भाषा में चीन का अर्थ है, मध्य या केंद्र। यानी सत्ता का केंद्र। इतिहास में //- आसपास के देश, उसे नजराना चुकाते थे। चीन उसी मानस मनोवृति से दुनिया पर अपना प्रभाव चाहता है। 1978 में //- 1 चीन आर्थिक महाशक्ति बनने का संकल्प ने चुका था। भारत के कदम किधर थे नीतियों के स्तर पर, खुद अपने //- पैरों पर हम कुल्हाड़ी मारते रहे। आर्थिक नीतियों में कर्ज संस्कृति बढ़ी। 1990 से 1991 आते आते हम दिवालिया होने //- को थे। तीन सप्ताह का विदेशी मुद्रा भंडार बचा था। विदेशी कर्ज चुकाने के पैसे नहीं थे। कैबिनेट सेके्रटरी नरेश //- चंद्रा और देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार दीपक नायर, तुरंत बने प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से मिले। कहा कि विदेशी ऋण चुकता //- 2 नहीं हुआ तो दुनिया में भारत की साख और प्रतिष्ठा खत्म हो जाएगी। प्रधानमंत्री सोना गिरवी रखने में हिचक रहे //- थे। कहा, इतिहास में मैं वह प्रधानमंत्री नहीं होना चाहता, जिसने देश का सोना बेचा। नरेश चंद्रा ने कहा सर //- तब आप इतिहास में ऐसे बन जाएंगे, जिन्होंने देश में बैंक करप्शन की घोषित की। प्रधानमंत्री ने कहा गो एहेड। //- यह स्थिति रातोंरात बनी बड़े अर्थशास्त्रियों का निष्कर्ष है कि अस्सी के दशक से बाहरी कर्ज लेने की जो मात्रा //- 3 बढ़ी, उसने भारत को दिवालिया होने के कगार पर पहुंचाया। पूर्व वित्त मंत्री आई.जी. पटेल ने कहा कि अल्पकालीन राजनीतिक //- लाभ के लिए केंद्र सरकारों ने अपना दायित्व छोड़ दिया। रिजर्व बैंक के कई गवर्नरों, मनमोहन सिंह जी 1982 से //- 1985, आर.एन. मल्होत्रा 1985 से 1990 समेत ने बार बार तत्कालीन प्रधानमंत्रियों को चेताया। 1991 में दुनिया के आर्थिक समीक्षकों //- ने लिखा कि भारत कठिनाई से अर्जित अपनी आर्थिक आजादी खोने की कगार पर था। 1988 तक भारत, चीन की //- 4 जी.डी.पी. बराबर थी। तीन दशक बाद अब चीन की जी.डी.पी. लगभग साढ़े चार गुना अधिक है। चीन के आक्रामक रवैये //- के संदर्भ में ली का व्यावहारिक आकलन, भविष्यवाणी साबित हुई है। अब आर्थिक ताकत बनना विकल्पहीन है। हम गांधीवादी, भौतिक //- प्रगति सब कुछ नहीं मानते। पर भारत ने तीन मौके 1948, 1977 और 1991 खोए। तब गांधीवादी विकास माॅडल अपनाकर, //- दुनिया के लिए नई लीक बन सकते थे। पर 1991 में हमने ग्लोबलाइजेशन का रास्ता चुना। अब इसी रास्ते आर्थिक //- 5 महाशक्ति बनना ही विकल्प है।

70 साल की प्रजातांत्रिक प्रणाली में विपक्ष को भी समय और स्थिति के अनुरूप प्रतिक्रिया देनी चाहिए जरूरी नहीं कि //- सामरिक मामलों में भी विपक्ष को सरकार हर तथ्य बताए इस ट्वीट के तीन घंटे बाद राहुल गांधी का एक //- और ट्वीट आया जिसमें शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई इसे प्रधानमंत्री की आलोचना के पहले किया जाना उचित होता //- यदि आपकी दृष्टि बाहर है तो दृश्य और उसकी दूरी की एक सीमा होगी तब बहुत अधिक दूर और स्पष्ट //- 1 नहीं देख पाएंगे लेकिन यदि आंखें बंद कर दृष्टि को अंतरतम तक मोड़ दिया तो बहुत दूर तक और बहुत //- साफ देख पाएंगे लंबे लाॅकडाउन के बाद जब धीरे धीरे धर्मस्थल खुल रहे हैं कुछ धार्मिक लोगों में एक नई //- बेचैनी शुरू हो गई हम मंदिर कब जा पाएंगे जो देवस्थानों में जा रहे हैं उनको देखकर नियम कायदों का //- हिसाब लगाने लगे हैं अरे दूसरे क्या कर रहे हैं उनका नसीब आप अपने भाग्य को सौभाग्य में बदलने का //- 2 प्रयास कीजिए धैर्य रखिए और भीड़ का हिस्सा बनने से बचिए कृष्ण से किसी ने पूछा आप द्वारिका से हस्तिनापुर //- बार बार क्यों जाते हैं आज इसी बात को ध्यान में रखना है यदि किसी देवस्थान तक न जा पाएं //- तो कमर सीधी आंखें बंदकर अपनी दृष्टि को भीतर उतारिए भगवान खुद पास आ जाएंगे सबसे बड़ी सुविधा ही यह //- है कि वह हिसाब से चलने को तैयार है बशर्त तरीका सही हो वैसे भी अधिकांश लोग जब मंदिर जाते //- 3 हैं तो सही मायने में वो वहां होते ही नहीं हैं उनका शरीर उनकी मांगने की वृत्ति वहां मौजूद होती //- है किसी स्वार्थ या भय के कारण लोग मंदिर की दहलीज पर माथा टेकते हैं भीड़ का हिस्सा बनने से //- तो अच्छा है योग करें नीयत साफ रखें अपनी आत्मा को पहचानें परमात्मा स्वयं चलकर आप तक आ जाएगा हमारे //- प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी की जिन उपलब्धियों का समर्थक बखान करते नहीं थकते उन्हीं में एक रिकाॅर्ड ऐसा है किसी भी //- 4 भारतीय प्रधानमंत्री ने इतनी बार बीजिंग की यात्रा नौ यात्राएं पांच बतौर पी.एम. चार बतौर गुजरात मुख्यमंत्री नहीं की हैं //- और चीनी नेतृत्व के साथ संबंध मजबूत करने में इतने व्यक्तिगत प्रयास नहीं किए जितने मोदी ने किए हैं इसलिए //- अगर 1962 युद्ध को नेहरूवादी चीन का बड़ा धोखा मानते हैं अगर जवाहरलाल नेहरू के चीन के प्रति लगाव का //- आधार प्राचीन सभ्यता के संबंधों का भ्रम था तो मोदी का चीन से संबंध बनाने का कारण वैचारिक कम निजी //- 5 ज्यादा रहा है/p>

प्रधानमंत्री ने कोयला खनन की वाणिज्यिक नीलामी का उद्घाटन करते हुए कहा आत्मनिर्भर भारत //- में हम जिन उत्पादों का आयात करते हैं उनका निर्यात करेंगे उद्यमिता से चीन की //- खोई जा रही वैश्विक आर्थिक जमीन भारत हासिल कर सकता है सूक्ष्म लघु व मध्यम //- उद्योगों को नुकसान से उबारने के लिए तीन लाख करोड़ रुपए का बिना गारंटी का //- 1 ऋण सुनने में अच्छा है उचित होगा कि इस सेक्टर की छः करोड़ इकाइयों केे //- बारह करोड़ श्रमिक पुनः उत्पादन में लगें लेकिन यह भावना नहीं कार्य संस्कृति राज्य और //- उसकी संस्थाओं के प्रति व्यक्ति का विश्वास है अच्छी क्वालिटी का माल तब बन सकेगा //- जब बैंक व उद्योग विभाग का सिस्टम भ्रष्टाचार मुख्य हो एक सर्वे में अठत्तर फीसदी //- 2 इकाइयों व तिरासी फीसदी स्वनियोजित लोगों ने कहा कि बैंकों में छोटे उद्यमियों के लिए //- कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है फिर डिमांड बनाना व अलग से उपभोक्ताओं व खरीदारों के //- हाथ में पैसे देने होंगे हालांकि वित्त मंत्रालय का कहना है कि सार्वजानिक बैंक इस //- सेक्टर को ऋण दे रहे हैं लेकिन उद्यमी इससे संतुष्ट नहीं हैं सरकार के अनुसार //- 3 अभी बत्तीस हज़ार करोड़ रुपये ऋण राशि मंजूर की है लेकिन घोषणा चालीस दिन बाद //- भी अभी तक सोलह हजार करोड़ हर्जा दिया गया है घोषित तीन लाख करोड़ की //- ऋण के वायदे के मुकाबले यह राशि निराशा पैदा करती है पैकेज में बीस हजार //- करोड़ इस सेक्टर की उन दो लाख इकाइयों के लिए देने का वादा था जो //- 4 दबाव व एन.पी.ए. वर्ग में आए हैं लेकिन कैबिनेट ने इसकी अनुशंसा एक जून को //- घोषणा के सत्रह दिन बाद की मतलब आर.बी.आई. अभी तक गाइडलाइन बैंकों को नहीं दे //- सकी है जाहिर है लाॅकडाउन के बाद लगभग हर उद्यमी बैंकों में गया होगा तो //- क्या वह बगैर किसी राहत के लौट रहा है तो फिर उद्यमिता विकसित कैसे होगी //- 5

हम संसार में अपने देश को आधुनिक आगे बढ़ते हुए राष्ट्र के रुप में प्रस्तुत //- करते हैं और ये सत्य है कि भारत दुनिया में वैज्ञानिक आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र //- में प्रोत्साहन और उन्नति के साथ एक राष्ट्र के रूप में प्रगति कर रहा है //- लेकिन जहां तक सामाजिक विकास का संबंध है यह अभी भी दुनिया के सबसे कम //- 1 रैंक के साथ नीचे स्तर के देशों में से एक है। भारत के मानव विकास //- सूचकांक 2013 की रिपोर्ट के अनुसार इसे कुल एक सौ सत्यासी देशों में से एक //- सौ पैतीसवां स्थान दिया गया है। ये भारत की सामाजिक संकेतकों में खेदजनक स्थिति को //- प्रदर्शित करता है इससे ये भी दिखाई देता है कि हम आज भी रूढ़िवादी मान्यताओं //- 2 विश्वासों के नकारात्मक दृष्टिकोण के समाज के रुप में जो समानता और भाईचारे के सिद्धान्त //- में विश्वास नहीं करता है। बहुत से सरकारी और गैर सरकारी संगठन सामाजिक क्षेत्र में //- इस स्थिति को सुघारने के लिये कार्यरत हैं लेकिन परिणाम उत्साहवर्धक नहीं हैं। शायद ये //- समस्या देश के लोगों के विश्वासों और मान्यताओं में बहुत गहराई के साथ बैठी हुई //- 3 है जो बदलाव की परिस्थितियों को स्वीकर नहीं करने दे रही है। उदाहरण के लिए //- कन्याभु्रण हत्या का मुख्य मुद्दा हमारे देश में शर्मनाक प्रथाओं में से एक हैं। यद्यपि //- सरकार के बहुत से निषेधात्मक उपाय हैं और गैर सरकारी संगठनों के प्रयास भी जारी //- हैं। इसके लिए असली कारण हमारे देश की समाज की पितृ सत्तात्मक व्यवस्था है जिसमें //- 4 ये माना जाता है कि पुरुष ही श्रेष्ठ हैं और महिलाएं उनकी अधीनस्थ हैं। जिसके //- कारण लड़की की तुलना में लड़के की बहुत ज्यादा चाह में कन्याभु्रण हत्या जैसे शर्मनाक //- कार्य को अंजाम दिया जाता है। इस प्रकार ये विश्वास प्रणाली या सांस्कृतिक मानसिकता वाले //- लोग समाज में तेजी से परिवर्तन होने में बाधा हैं।"

फिल्मों के इस मशहूर कलाकार का जीवन इंद्रधनुशी रंगों की तरह है जिसमें कार्य योजना के अनेक भाव विद्यमान हैं। //- बलराज का परिवार आर्यसमाजी था। पिता हरबंस लाल का अच्छा खासा व्यापार था। 1 मई 1913 को रावलपिंडी में बलराज //- का जन्म हुआ था। हालांकि बचपन में शुरुवाती नाम युद्धिष्ठर रखा गया था लेकिन उनकी फूफी ठीक से उनका नाम //- नहीं ले पात थी। उन दिनों आर्य समाजी परिवारों के बच्चों के नाम हिन्दु देवमाला के अनुसार रखने का चलन //- 1 था। युद्धिष्ठर की जगह लोग उन्हें रजिस्टर बुलाने लगे तो विवशतः बालक का नाम बलराज साहनी रखना पड़ा। पिता हरबंस //- लाल ने बलराज का दाखिला गुरुकुल में करा दिया लेकिन वहां बलराज को धर्म के आधार पर पढ़ना पसंद नहीं //- आ रहा था तो एक दिन हिम्मत करके पिता जी से कह दिया कि मैं गुरुकुल में नहीं पढुंगा। पिता //- ने नाराजगी जताई लेकिन बलराज का दाखिला डी.ए.वी. में करवा दिया। यहां से बलराज नाटक इत्यादि में अपनी प्रतिभा का //- 2 प्रदर्शन करने लगे थे। जब 7वीं में पढते थे तब उन्होंने एक हस्तलिखित पत्रिका भी निकाली थी। मैट्रिक पास करने //- के बाद बलराज डी.ए.वी. काॅलेज में पढ़ने लगे जहां संस्कृत और दर्शन शास्त्र अनिवार्य विषय थे। उन दिनों अंग्रेजी के //- शिक्षक जसवंत राय का उनपर विशेष प्रभाव था। काॅलेज के दौरान बलराज का दृष्टिकोण कुछ बदला और उनपर देशभक्ति का //- नशा चढ़ने लगा था। भगत सिंह को जब फांसी दी गई तो उनको बहुत खराब लगा। उन्होंने भगत सिंह पर //- 3 अंग्रेजी में एक कविता लिखी। प्रथम श्रेणी में पास होने के बाद बलराज लाहौर पढ़ना करने के लिये जाना चाहते //- थे। लेकिन पिता चाहते थे कि वे लंदन में आॅफिस कायम करें। बहरहाल बलराज को काॅमर्स में कोई दिलचस्पी नहीं //- थी और उन्होंने गवर्नमेंट काॅलेज में दाखिला लिया जहां चार साल में बी.ए. तथा एम.ए. अंग्रेजी में करके पढ़ाई पूरी //- की। इसी दौरान वहां वे उर्दु में कविताएं भी लिखने लगे थे। कई नाटकों में अभिनय भी किये, जैसे कि //- 4 कार्ल कोपेक का मशहूर नाटक आर.यू.आर. इत्यादि। यहां पर बलराज को क्लासिकल संगीत के साथ पश्चिम संगीत में भी दिलचस्पी //- हो गई थी। कुछ समय पश्चात बलराज के छोटे भाई भीष्म साहनी भी लाहौर आ गये थे और दोनों भाई //- साथ साथ रहते थे। 1934 में अपने घर रावलपिंडी वापस आकर पिता के कारोबार में हाथ बंटाने लगे। कारोबार को //- बढ़ाने के उद्देश्य से बम्बई गये लेकिन वहां बस सैर सपाटा किया और व्यापार में घाटा करा कर वापस आ //- 5 गये।"

हम संसार में अपने देश को आधुनिक आगे बढ़ते हुये राष्ट्र के रुप में प्रस्तुत करते हैं और ये सत्य //- है कि भारत दुनिया में वैज्ञानिक आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में प्रोत्साहन और उन्नति के साथ एक राष्ट्र के रूप //- में प्रगति कर रहा है लेकिन जहाॅ तक सामाजिक विकास का संबंध है यह अभी भी दुनिया के सबसे कम //- रैंक के साथ नीचे स्तर के देशों में से एक है भारत के मानव विकास सूचकांक 2013 की रिपोर्ट के //- 1 अनुसार इसे कुल एक सौ सत्यासी देशों में से एक सौ पैतीसवां स्थान दिया गया है। ये भारत की सामाजिक //- संकेतकों में खेदजनक स्थिति को प्रदर्शित करता है। इससे ये भी दिखाई देता है कि हम आज भी रुढ़िवादी मान्यताओं //- विश्वासों के नकारात्मक दृष्टिकोण के समाज के रुप में हैं जो समानता और भाईचारे के सिद्धान्त में विश्वास नहीं करता //- है। बहुत से सरकारी और गैर सरकारी संगठन सामाजिक क्षेत्र में इस स्थिति को सुघारने के लिये कार्यरत हैं लेकिन //- 2 परिणाम उत्साहवर्धक नहीं हैं। शायद ये समस्या देश के लोगों के विश्वासों और मान्यताओं में बहुत गहराई के साथ बैठी //- हुई है जो बदलाव की परिस्थितियों को स्वीकर नहीं करने दे रही है। उदाहरण के लिए कन्या भु्रण हत्या का //- मुद्दा हमारे देश में शर्मनाक प्रथाओं में से एक हैं। यद्यपि सरकार के बहुत से निषेधात्मक उपाय हैं और गैर //- सरकारी संगठनों के प्रयास भी जारी हैं। इस के लिए असली कारण हमारे देश की समाज की पितृ सत्तात्मक व्यवस्था //- 3 है जिसमें ये माना जाता है कि पुरुष ही श्रेष्ठ हैं और महिलाएं उनकी अधिनस्थ हैं। जिसके कारण लड़की की //- तुलना में लड़के की बहुत ज्यादा चाह में कन्या भु्रण हत्या जैसे शर्मनाक कार्य को अंजाम दिया जाता है। इस //- प्रकार ये विश्वास प्रणाली या सांस्कृतिक मानसिकता वाले लोग समाज में तेजी से परिवर्तन होने में बाधा हैं। हांलाकि अब //- समाज में बहुत से सकारात्मक परिवर्तन भी हुये हैं जैसे अब लड़कियाॅ बहुत बड़ी संख्या में स्कूल जा रही हैं //- 4 और उनकी रोजगार दर में भी वृद्धि हुई है सम्पूर्ण अशिक्षा की दर में कमी हुई है अनुसूचित जाति व //- जनजातियों की स्थिति में सुधार हुआ है आदि लेकिन स्थिति आज भी सन्तुष्टि के स्तर से बहुत दूर है। हम //- अपने घरों में ही महिलाओं के साथ हो रहे असमानता के व्यवहार के गवाह हैं हम महिलाओं के साथ हो //- रही यौन हिंसा के बारे में दैनिक आधार पर सुन सकते हैं कन्या भु्रण हत्या लगातार जारी है सामुदायिक धार्मिक //- 5 हिंसा अपने उत्थान पर हैं छूआछूत अभी भी वास्तविकता है बालश्रम बड़े पैमाने पर कराया जा रहा है आदि। अतः //- इन स्थितियों में सुधार के लिए और भी अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है और लोगों के दिमाग की गहराई //- में बैठे हुए गलत विश्वासों मान्यताओं व प्रथाओं को बदले बिना इन स्थितियों को सुधारना बहुत कठिन कार्य है। इस //- उद्देश्य के लिए सबसे उपयुक्त तरीका लोगों को विभिन्न सामाजिक समास्याओं के बारे में शिक्षित करना होगा और उन्हें अपनी //- 6 सोच बदलने के लिए प्रेरित करना होगा। क्योंकि लोगों को खुद को बदलने केे लिए प्रेरित किये बिना कोई भी //- सरकारी या गैर सरकारी संस्था के प्रयास आधे अधूरे साबित होंगे।"

हम संसार में अपने देश को आधुनिक आगे बढ़ते हुये राष्ट्र के रुप में प्रस्तुत करते हैं और ये सत्य है कि भारत दुनिया में -//- वैज्ञानिक आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में प्रोत्साहन और उन्नति के साथ एक राष्ट्र के रूप में प्रगति कर रहा है लेकिन जहाॅ तक सामाजिक विकास -//- का संबंध है यह अभी भी दुनिया के सबसे कम रैंक के साथ नीचे स्तर के देशों में से एक है। भारत के मानव विकास -//- सूचकांक 2013 की रिपोर्ट के अनुसार इसे कुल 187 देशों में से 135वां स्थान दिया गया है। ये भारत की सामाजिक संकेतकों में खेदजनक स्थिति -//- 1 को प्रदर्शित करता है। इससे ये भी दिखाई देता है कि हम आज भी रुढ़िवादी मान्यताओं विश्वासों के नकारात्मक दृष्टिकोण के समाज के रुप में -//- हैं जो समानता और भाईचारे के सिद्धान्त में विश्वास नहीं करता है। बहुत से सरकारी और गैर सरकारी संगठन सामाजिक क्षेत्र में इस स्थिति को -//- सुघारने के लिये कार्यरत हैं लेकिन परिणाम उत्साहवर्धक नहीं हैं। शायद ये समस्या देश के लोगों के विश्वासों और मान्यताओं में बहुत गहराई के साथ -//- बैठी हुई है जो बदलाव की परिस्थितियों को स्वीकर नहीं करने दे रही है। उदाहरण के लिए कन्याभु्रण हत्या का मुद्दा हमारे देश में शर्मनाक -//- 2 प्रथाओं में से एक हैं। यद्यपि सरकार के बहुत से निषेधात्मक उपाय हैं और गैर सरकारी संगठनों के प्रयास भी जारी हैं। इस के लिए -//- असली कारण हमारे देश की समाज की पितृ सत्तात्मक व्यवस्था है जिसमें ये माना जाता है कि पुरुष ही श्रेष्ठ है और महिलाएं उनकी अधिनस्थ -//- हैं। जिसके कारण लड़की की तुलना में लड़के की बहुत ज्यादा चाह में कन्या-भु्रण हत्या जैसे शर्मनाक कार्य को अंजाम दिया जाता है। इस प्रकार -//- ये विश्वास प्रणाली या सांस्कृतिक मानसिकता वाले लोग समाज में तेजी से परिवर्तन होने में बाधा हैं।"

हम संसार में अपने देश को आधुनिक आगे बढ़ते हुए राष्ट्र के रुप में प्रस्तुत करते हैं और ये सत्य //- है कि भारत दुनिया में वैज्ञानिक आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में प्रोत्साहन और उन्नति के साथ एक राष्ट्र के रूप //- में प्रगति कर रहा है लेकिन जहां तक सामाजिक विकास का संबंध है यह अभी भी दुनिया के सबसे कम //- रैंक के साथ नीचे स्तर के देशों में से एक है। भारत के मानव विकास सूचकांक 2013 की रिपोर्ट के //- 1 अनुसार इसे कुल एक सौ सत्यासी देशों में से एक सौ पैतीसवां स्थान दिया गया है। ये भारत की सामाजिक //- संकेतकों में खेदजनक स्थिति को प्रदर्शित करता है। इससे ये भी दिखाई देता है कि हम आज भी रुढ़िवादी मान्यताओं //- विश्वासों के नकारात्मक दृष्टिकोण के समाज के रुप में हैं जो समानता और भाईचारे के सिद्धान्त में विश्वास नहीं करता //- है। बहुत से सरकारी और गैर सरकारी संगठन सामाजिक क्षेत्र में इस स्थिति को सुधारने के लिये कार्यरत हैं लेकिन //- 2 परिणाम उत्साहवर्धक नहीं हैं। शायद ये समस्या देश के लोगों के विश्वासों और मान्यताओं में बहुत गहराई के साथ बैठी //- हुई है जो बदलाव की परिस्थितियों को स्वीकर नहीं करने दे रही है। उदाहरण के लिए कन्याभु्रण हत्या का मुद्दा //- हमारे देश में शर्मनाक प्रथाओं में से एक है यद्यपि सरकार के बहुत से निषेधात्मक उपाय हैं और गैर सरकारी //- संगठनों के प्रयास भी जारी हैं। इसके लिए असली कारण हमारे देश की समाज की पितृ सत्तात्मक व्यवस्था है जिसमें //- 3 ये माना जाता है कि पुरुष ही श्रेष्ठ हैं और महिलाएं उनकी अधीनस्थ हैं। जिसके कारण लड़की की तुलना में //- लड़के की बहुत ज्यादा चाह में कन्या भु्रण हत्या जैसे शर्मनाक कार्य को अंजाम दिया जाता है। इस प्रकार ये //- विश्वास प्रणाली या सांस्कृतिक मानसिकता वाले लोग समाज में तेजी से परिवर्तन होने में बाधा हैं। हांलाकि अब समाज में //- बहुत से सकारात्मक परिवर्तन भी हुये हैं जैसे अब लड़कियां बहुत बड़ी संख्या में स्कूल जा रही हैं और उनकी //- 4 रोजगार दर में भी वृद्धि हुई है सम्पूर्ण अशिक्षा की दर में कमी हुई है अनुसूचित जाति व जनजातियों की //- स्थिति में सुधार हुआ है आदि लेकिन स्थिति आज भी संतुष्टि के स्तर से बहुत दूर है। हम अपने घरों //- में ही महिलाओं के साथ हो रहे असमानता के व्यवहार के गवाह हैं हम महिलाओं के साथ हो रही यौन //- हिंसा के बारे में दैनिक आधार पर सुन सकते हैं कन्याभु्रण हत्या लगातार जारी है सामुदायिक धार्मिक हिंसा अपने उत्थान //- 5 पर हैं छूत अछूत अभी भी वास्तविकता है बालश्रम बड़े पैमाने पर कराया जा रहा है आदि।"

हम संसार में अपने देश को आधुनिक आगे बढ़ते हुए राष्ट्र के रुप में प्रस्तुत करते हैं और ये सत्य //- है कि भारत दुनिया में वैज्ञानिक आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में प्रोत्साहन और उन्नति के साथ एक राष्ट्र के रूप //- में प्रगति कर रहा है लेकिन जहां तक सामाजिक विकास का संबंध है यह अभी भी दुनिया के सबसे कम //- रैंक के साथ नीचे स्तर के देशों में से एक है। भारत के मानव विकास सूचकांक 2013 की रिपोर्ट के //- 1 अनुसार इसे कुल एक सौ सत्यासी देशों में से एक सौ पैतीसवां स्थान दिया गया है। ये भारत की सामाजिक //- संकेतकों में खेदजनक स्थिति को प्रदर्शित करता है। इससे ये भी दिखाई देता है कि हम आज भी रुढ़िवादी मान्यताओं //- विश्वासों के नकारात्मक दृष्टिकोण के समाज के रुप में हैं जो समानता और भाईचारे के सिद्धान्त में विश्वास नहीं करता //- है। बहुत से सरकारी और गैर सरकारी संगठन सामाजिक क्षेत्र में इस स्थिति को सुधारने के लिये कार्यरत हैं लेकिन //- 2 परिणाम उत्साहवर्धक नहीं हैं। शायद ये समस्या देश के लोगों के विश्वासों और मान्यताओं में बहुत गहराई के साथ बैठी //- हुई है जो बदलाव की परिस्थितियों को स्वीकर नहीं करने दे रही है। उदाहरण के लिए कन्याभु्रण हत्या का मुद्दा //- हमारे देश में शर्मनाक प्रथाओं में से एक है यद्यपि सरकार के बहुत से निषेधात्मक उपाय हैं और गैर सरकारी //- संगठनों के प्रयास भी जारी हैं। इसके लिए असली कारण हमारे देश की समाज की पितृ सत्तात्मक व्यवस्था है जिसमें //- 3 ये माना जाता है कि पुरुष ही श्रेष्ठ हैं और महिलाएं उनकी अधीनस्थ हैं। जिसके कारण लड़की की तुलना में //- लड़के की बहुत ज्यादा चाह में कन्या भु्रण हत्या जैसे शर्मनाक कार्य को अंजाम दिया जाता है। इस प्रकार ये //- विश्वास प्रणाली या सांस्कृतिक मानसिकता वाले लोग समाज में तेजी से परिवर्तन होने में बाधा हैं। हांलाकि अब समाज में //- बहुत से सकारात्मक परिवर्तन भी हुये हैं जैसे अब लड़कियां बहुत बड़ी संख्या में स्कूल जा रही हैं और उनकी //- 4 रोजगार दर में भी वृद्धि हुई है सम्पूर्ण अशिक्षा की दर में कमी हुई है अनुसूचित जाति व जनजातियों की //- स्थिति में सुधार हुआ है आदि लेकिन स्थिति आज भी संतुष्टि के स्तर से बहुत दूर है। हम अपने घरों //- में ही महिलाओं के साथ हो रहे असमानता के व्यवहार के गवाह हैं हम महिलाओं के साथ हो रही यौन //- हिंसा के बारे में दैनिक आधार पर सुन सकते हैं कन्याभु्रण हत्या लगातार जारी है सामुदायिक धार्मिक हिंसा अपने उत्थान //- 5 पर हैं छूत अछूत अभी भी वास्तविकता है बालश्रम बड़े पैमाने पर कराया जा रहा है आदि।"

हम संसार में अपने देश को आधुनिक आगे बढ़ते हुए राष्ट्र के रुप में प्रस्तुत करते हैं और ये सत्य है कि भारत दुनिया में -//- वैज्ञानिक आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में प्रोत्साहन और उन्नति के साथ एक राष्ट्र के रूप में प्रगति कर रहा है लेकिन जहां तक सामाजिक विकास -//- का संबंध है यह अभी भी दुनिया के सबसे कम रैंक के साथ नीचे स्तर के देशों में से एक है भारत के मानव विकास -//- सूचकांक 2013 की रिपोर्ट के अनुसार इसे कुल एक सौ सत्यासी देशों में से एक सौ पैतीसवां स्थान दिया गया है। ये भारत की सामाजिक -//- 1 संकेतकों में खेदजनक स्थिति को प्रदर्शित करता है। इससे ये भी दिखाई देता है कि हम आज भी रुढ़िवादी मान्यताओं विश्वासों के नकारात्मक दृष्टिकोण के -//- समाज के रुप में हैं जो समानता और भाईचारे के सिद्धान्त में विश्वास नहीं करता है। बहुत से सरकारी और गैर सरकारी संगठन सामाजिक क्षेत्र -//- में इस स्थिति को सुघारने के लिये कार्यरत हैं लेकिन परिणाम उत्साहवर्धक नहीं हैं। शायद ये समस्या देश के लोगों के विश्वासों और मान्यताओं में -//- बहुत गहराई के साथ बैठी हुई है जो बदलाव की परिस्थितियों को स्वीकर नहीं करने दे रही है। उदाहरण के लिए कन्याभु्रण हत्या का मुद्दा -//- 2 हमारे देश में शर्मनाक प्रथाओं में से एक हैं। यद्यपि सरकार के बहुत से निषेधात्मक उपाय हैं और गैर सरकारी संगठनों के प्रयास भी जारी -//- हैं। इसके लिए असली कारण हमारे देश की समाज की पितृ सत्तात्मक व्यवस्था है जिसमें ये माना जाता है कि पुरुष ही श्रेष्ठ हैं और -//- महिलाएं उनकी अधिनस्थ हैं। जिसके कारण लड़की की तुलना में लड़के की बहुत ज्यादा चाह में कन्या भु्रण हत्या जैसे शर्मनाक कार्य को अंजाम दिया -//- जाता है। इस प्रकार ये विश्वास प्रणाली या सांस्कृतिक मानसिकता वाले लोग समाज में तेजी से परिवर्तन होने में बाधा हैं। हांलाकि अब समाज में -//- 3 बहुत से सकारात्मक परिवर्तन भी हुए हैं जैसे अब लड़कियां बहुत बड़ी संख्या में स्कूल जा रही हैं और उनकी रोजगार दर में भी वृद्धि -//- हुई है सम्पूर्ण अशिक्षा की दर में कमी हुई है अनुसूचित जाति व जनजातियों की स्थिति में सुधार हुआ है आदि लेकिन स्थिति आज भी -//- संतुष्टि के स्तर से बहुत दूर है। हम अपने घरों में ही महिलाओं के साथ हो रहे असमानता के व्यवहार के गवाह हैं हम महिलाओं -//- के साथ हो रही यौन हिंसा के बारे में दैनिक आधार पर सुन सकते हैं कन्या भु्रण हत्या लगातार जारी है सामुदायिक धार्मिक हिंसा अपने -//- 4 उत्थान पर हैं छूआछूत अभी भी वास्तविकता है बालश्रम बड़े पैमाने पर कराया जा रहा है आदि। अतः इन स्थितियों में सुधार के लिए ओर -//- भी अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है और लोगों के दिमाग की गहराई में बैठे हुए गलत विश्वासों मान्यताओं व प्रथाओं को बदले बिना इन -//- स्थितियों को सुधारना बहुत कठिन कार्य है। इस उद्देश्य के लिए सबसे उपयुक्त तरीका लोगों को विभिन्न सामाजिक समस्याओं के बारे में शिक्षित करना होगा -//- और उन्हें अपनी सोच बदलने के लिए प्रेरित करना होगा। क्योंकि लोगों को खुद को बदलने के लिए प्रेरित किए बिना कोई भी सरकारी या -//- 5 गैर सरकारी संस्था के प्रयास आधे अधूरे साबित होंगे।"

यदि हम भारत को सही में इक्कीसवीं शताब्दी का सच्चा विश्व नेता बनाना चाहते हैं तो ये अनिवार्य //- है कि हमें अपने सामाजिक स्तर में सुधार करने चाहिए। संगीत सभी के जीवन में महान भूमिका निभाता //- है। यह हमें खाली समय में व्यस्त रखता है और हमारे जीवन को शान्त पूर्ण बनाता है। सुव्यवस्थित //- ध्वनि जो रस की दृष्टि से उत्पन्न होती है वह संगीत कहलाती है। संगीत के मोहन सुर की //- 1 मादकता का जीव जगत पर जो प्रभाव पड़ता है वह किसी से छिपा नहीं है संगीत हमारे जीवन //- में आन्तरिक और आवश्यक भूमिका निभाता है संगीत विभिन्न प्रकार का होता है जिसका हम अपनी आवश्यकता और //- जरूरत के अनुसार आनंद ले सकते हैं। जीवन में खुश और व्यस्त रहने के लिए संगीत सबसे अच्छा //- तरीका है। इस व्यस्त भीड़ भाड़ और भ्रष्ट संसार में जहां हर कोई हरेक समय एक दूसरे को //- 2 हानि पहुंचाना चाहता है ऐसे कठिन समय में संगीत हमें खुश रखता है और हमारे मस्तिष्क को राहत //- प्रदान करने में मदद करता है मैंने अपने वास्तविक जीवन में स्वयं यह महसूस किया है कि संगीत //- वास्तव में हमेशा खुश रखने में सहायता प्रदान करने वाला एक साधन है। संगीत ध्यान और योग से //- अधिक है क्योंकि यह हमारे शरीर और दिमाग दोनों को लाभ पहुंचाता है। हम पूरे दिन में कभी //- 3 भी संगीत सुन सकते हैं माध्यम आवाज में संगीत सुनना एक बहुत ही अच्छी आदत है। मैं हमेशा //- अपनी पढ़ाई के समय पर संगीत सुनना पसंद करता हूं और विशेष रुप से अपनी परीक्षा के समय //- पर। यह पढ़ाई के दौरान मेरे एकाग्रता को बढ़ाने में काफी मदद करता है और यह वास्तव में //- मुझे काफी अच्छा परिणाम भी देता है। जिसके कारण मैं अपने विषयों में अच्छे अंक प्राप्त कर पाता //- 4 हूं। मैं हर सुबह आध्यात्मिक संगीत सुनता हूं क्योंकि मेरे पिता मेरे कमरे में सुबह पांच बजे संगीत //- शुरू कर देते हैं। वह मुझे हमेशा यही बताते हैं कि संगीत वो शक्ति है जो हमें स्वयं //- भगवान ने हमें दी है। इसे कभी भी बंद नहीं करना चाहिए। संगीत वो शक्तिशाली यंत्र है जो //- हमारी ध्यान की शक्ति को बढ़ाता है।"